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Tuesday, 9 January 2018

मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना से ज्योति व उसका परिवार हुआ खुषहाल

सफलता की कहानी

मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना से ज्योति व उसका परिवार हुआ खुषहाल 

खण्डवा 9 जनवरी, 2018 - रामनगर, खण्डवा निवासी ज्योति पति पे्रमलाल संदूके के लिए मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना वरदान सिद्ध हुई है। पहले घर में ही सिलाई , कढ़ाई करने वाली ज्योति इस योजना में मिली 1.60 लाख रूपये की आर्थिक मदद से अब सफल व्यवसायी बनती जा रही है। ज्योति ने बताया कि उसे लगभग 48 हजार रूपये की अनुदान सुविधा भी मिल गई है, जिससे उसे मात्र 1.12 लाख रूपये ही चुकाना है। अन्त्यावसायी की स्वरोजगार योजना के तहत मिली आर्थिक मदद से ज्योति ने अपने ही घर में सिलाई, कढ़ाई, पीको व फाॅल के साथ साथ कटलरी, साड़ी विक्रय व महिलाओं की श्रंगार सामग्री का छोटा सा शोरूम प्रारंभ किया है। वह बताती है कि बैंक की 3800 रूपये की मासिक किष्त व अन्य खर्चे निकालकर 20-25 हजार रूपये महीने आसानी से बचत हो जाती है, जिससे परिवार का पालन पोषण बहुत अच्छे तरीके से हो रहा है। 
ज्योति ने बताया कि शादी से पहले उसने मायके में सिलाई , कढ़ाई सीख ली थी तथा सिलाई करके वह अपनी छोटी मोटी जरूरतों को पूरा कर लेती थी। शादी के बाद उसने अनुभव किया कि पति प्रेमलाल का भी कोई स्थाई आय का साधन नहीं था। घर में तीन बच्चों के जन्म के बाद ज्योति को आय बढ़ाने की आवष्यकता महसूस हुई तब उसे याद आया कि क्यों न वह सिलाई करना प्रारंभ कर दे, जिससे थोड़ा बहुत कमाकर व अपने पति की मदद कर सकती है। कुछ दिन उसने घर में ही आसपास की महिलाओं के ब्लाउज व सलवार सूट सिलने का कार्य किया, लेकिन इस सबसे उतनी आय नहीं हुई जिससे तीन बच्चों व पति के साथ वह अच्छी तरह रह सके। वह पति की मदद के लिए सिलाई के व्यवसाय को बढ़ाना तो चाहती थी, लेकिन पूंजी के अभाव में ऐसा नहीं कर पा रही थी। 
 तभी किसी ने ज्योति बताया कि अन्त्यवसायी समिति की मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत अनुसूचित जाति वर्ग के गरीब लोगों को छोटे व्यवसाय प्रारंभ के लिए मदद दी जाती है। चूंकि वह सिलाई जानती थी इसलिए उसने सिलाई व साड़ी विक्रय व्यवसाय के लिए आवेदन किया, कुछ दिन बाद उसका कुल 1.60 लाख रूपये के ऋण का प्रकरण  सेंट्रल बैंक आॅफ इण्डिया षिवाजी चैक से स्वीकृत हो गया है, जिससे दो सिलाई मषीन व शोरूम के लिए फर्नीचर व विक्रय हेतु साड़ी व अन्य कपड़े व सौंदर्य प्रसाधन सामग्री खरीदकर घर में ही व्यवसाय प्रारंभ कर दिया। ज्योति की बहन सूरत गुजरात में रहती है अतः उसकी मदद से ज्योति सूरत से थोक में साड़ियां लाकर खण्डवा में अपने घर पर विक्रय करती है, जिससे उससे काफी बचत हो जाती है। आज ज्योति अपने पति प्रेमलाल व तीन बच्चों के साथ सुखी जीवन व्यतीत कर रही है तथा प्रदेष सरकार की मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना का हमेषा आभार मानती है, जिसने उसे बुरे वक्त में मदद की। 

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